Thursday, November 12, 2009


पतझड़ के फूलों को भी मुसकुरने का हक़ है,
बिरहा के मेघों को भी बरसने का हक़ है।
इस दिल में दर्द के आलावा भी भाव एक है,
मेरी आँखों में भी सपने अनेक हैं।

चलना चाहो साथ तो चल सकते हो,
अपने सपनो को मेरे साथ जी सकते हो।
भावों का सागर उन्मुक्त धारा पर बह जाएगा,
अधूरी आशाओं का सिन्धु पीछे छोड़ जाएगा।

मिल जायेंगे दो हाथ तो पथ हो जाएगा आसान,
काटों का बिछोना पुष्प की सेज बन जाएगा।
नई डगर पर काफिला निकलेगा अपना,
और अवश्य ही पूर्ण होगा हमारा ये सपना।

तुम्हारे लिए


पाना चाहूं तुमको, पर पाना है मुश्किल।
उड़ती पतंग को धारा से मिलाना है मुश्किल।

आशा हैं आँखों में अब भी लेकिन बाकी,
आओगे तुम एक दिन लेने मुझे साथी।

प्रेम की भाषा तो आँखों से ही बोली जाती है,
मानो दिल से दिल की बात सासों से पहुंचाई जाती है।

लव्जों में करुँ कैसे मैं बयान, दिल में मेरे छिपा है क्या।
लाखों भावनाओं का हार है यह, पिरोया केवल तुम्हारे लिए.

Tuesday, October 6, 2009

आकाश के पार आज चले हम
हर एक बंधन तोड़ चलें हम।
हर रिश्ते से आजाद होकर आज,
इस जीवन को एक बार फिर जी लें हम।

किसने क्या सोचा ये कौन करे अब परवाह
किसने क्या कहा इसकी किसे है चिंता।
व्यर्थ ही समय बरबाद करे बिना
अपने सपनो का संसार बनाएं हम।

मूल नही उन रिश्तों का
जो तनहा तुम्हे भीड़ में छोडें।
मूल नहीं उन बातों का,
जो ज़ख्मो को केवल खोदें।

राही तू अकेला है,
मत भूल इस बात को कभी।
तन्हाई को लेकर साथ
अब कोई मंजिल ढूंढ नई।

Friday, April 17, 2009

खालीपन-मेरे सभी सईनियरस के लिए

आज का यह दिन क्यूँ आया हमारे जीवन में,
एक अजब सा एहसास है मेरे मन में।
आंखों में अश्कों का सैलाब-सा रुका है
मनो एक खालीपन-सा मेरे दरवाज़े पर आ खड़ा हुआ है।

रोकूँ कैसे तुम्हे समझ नही आता,
काश ये वक्त आज यही थम जाता।
जिन हाथों को थाम चलना सीखा था IIIT में मैंने,
क्यूँ वक्त चाहता है उन्हें मुझसे दूर यूँ कर लेना।

हॉस्टल के उन कमरों में नए चेहरों का बसेरा होगा,
तेरी खिलखिलाहट का तब भी वहाँ बसेरा होगा।
एक बच्चे की तरह जाओंगी खटखटाने कमरा तेरा,
जानती हूँ जबकि कोई न वहाँ जवाब देने वाला होगा।

LT की lab में हमेशा मस्ती हुआ करेगी,
तेरे लतीफों की हँसी दूर तक गूंजा करेगी।
कोई कभी न भर पायेगा तेरे दिए खालीपन को,
तेरे प्यार और प्रेरण की बूँद मेरे खून में बहेगी।

आज दुआ है बस यही, नई ऊन्चायिओं को पाओ तुम,
जीवन के इस पग पर निरंतर आगे बढो तुम।
एक बात लेकिन कहना चाहूंगी तुमसे आज
दिल के किसी कोने में रखना हमें याद
बस यही है तेरे दिए हुए खालीपन का इलाज।

Monday, February 16, 2009

क्यूँ जो चाहिए वो उस पल मिलता नही,
हर इच्छा पूरी होने के बाद भी इच्छाएं ख़तम होती नही।
मनतैँ मांगे इंसान, पर पूरी होने में वक्त लगता है,
तब तक इंसान इतिहास बनता दीखता है।

चाहत की सीमाएं कीसने मापी हैं अब तक,
धड़कनों की रफ़्तार नही जान पाया कोई अब तक।
दीळ की बात बस दिल तक पहुंचाई नही जाती,
दिए को छोड़ मानो अकेले चली हो बाति।

क्यूँ कुछ पन्ने कोरे ही रह जाते हैं,
चुने हुए रंग बेकार पड़े रह जाते हैं।
जल जाती है इंसान की चीता भी,
कोरी राख ही केवल बाकी रह जाती है।