Sunday, January 6, 2013

बदलते रिश्ते


बार बार खुद से वादा करके देख लिया,
बार बार खुद को समझकर देख लिया।
न आओगे अब वापिस लौटकर तुम,
इस एहसास क साथ जीकर भी देख लिया।।

गम क सैलाब, कम होता ही नहीं,
तुम्हारा एहसास दूर होता ही नहीं।
हर पल की याद, जो बिताया था साथ,
आँखों से ओझल होता ही नहीं।। 

कुछ पल तो साथ चले  थे,
सुख  दु:ख भी साथ बांटे थे।
आज रास्ते जुदा हो गए,
सारे नाते उम्र भर के लिए बदल गए।।

ये कहकर की कुछ संभव न था,
ये मानकर की यही होना था।
एक अनजान समुद्र में तुमने धकेल दिया,
जहां डूबने का दर नहीं है, लेकिन जीने की अभिलाषा भी नहीं है।।

जीवन के इस नए पड़ाव में,
बढ़ते जाना आगे तुम।
मुड़के देखना न कभी पीछे,
कि खाली दिल अपना ही पाओगे तुम।।    


Sunday, July 15, 2012

पीड़ा 

आज से पहले ये एहसास हुआ नही कभी
इस दिल के कारण जो कुछ सहा, दर्द हुआ नहीं कभी।
इतना रुलाया तुमने, मुझको तडपाया तुमने,
की बाकी अब जीने को कुछ बचा नही।

कुसूर येही था कि चाहा  तुमको
कुसूर येही था की इस दिल ने अपनाया तुमको।
तुम्हारी तरह आँखें बंद करके,
अपने दिल को बहलाना न आया हमको.

करना था जो तुम वो कर चुके,
जीवन का ऐसा गम मुझे  दे चुके.
एहसास लेकिन कभी होगा नहीं तुम्हे
कहीं न कहीं एक गुनेहगार तुन बन चुके।

भ्रम येही था की समझा सदएव् रहोगे साथ तुम,
हर कठिनाई में साथ चलोगए  तुम।
किन्तु मुझको ही बदनाम करके,
नया जीवन बसाने चले जाओगे तुम.
ऐसा कभी तुमको सोचा न था, सोचा न था।











Tuesday, November 29, 2011

खुद फूनकके जहां इस दुनिए से चले हम,
रास्ते सारे मिटाके चले हम।
रुसवाई का सामान बहुत भारी हो चला है,
हर किसी को अलविदा कह चले हम।

Wednesday, February 16, 2011

हम
क्या करे वो इंसान,जो खोया हो खुद में ही?
दुनिया की रीतों का एह्सास ही जिसे नहीं।
मानो मेरी बात जब होता है ये एहसास,
चूर चूर हो जातें हैं ख्वाब, और मिलती नहीं है जीने की आस।

पल पल चाहा जिसको, पल पल देखा जिसको,
एक पल में बढ़ जाता है आगे ठुकराके तुमको।
ना तुम बदले ना वो बदला,
हालातों ने बस दोनों से मुँह है मोड़ा।

कह दिया एक बार में, के साथ जीना होगा मुश्किल,
इस राह पे अब आगे बढ़ना होगा नामुमकिन।
सफ़र में अकेला रह जाता है वो राही,
और पकड़ने के लिए एक भी मिलती नहीं पाती।

हर पल जगती रहती है सोयी आस यही,
काश ना जाओ तुम, रुक जाओ यहीं।
मेरे लिए नहीं, अपने लिए नहीं,
रुको हम दोनों क लिए ही।

Tuesday, December 21, 2010

मेरा प्यार

कल तक तो मेरा हर आंसू तुम्हे रुलाता था,
कल तक तो मेरी हंसी तुम्हे हंसाती थी।
आज क्या हो गया?
मेरी चुनर का रंग क्यूँ खो गया?
शब्द जो थे तुम्हारे लिए,
लिखके अनदेखें से हो गए।
मेरी चाहत नआ समझे थे तुम कभी,
ना उम्मीद ही है अब की समझोगे कभी।
ये मोहब्बत लेकिन दे दी है अब तो तुमको,
ना होगी ये दोबारा अब हमसे।