Tuesday, October 6, 2009

आकाश के पार आज चले हम
हर एक बंधन तोड़ चलें हम।
हर रिश्ते से आजाद होकर आज,
इस जीवन को एक बार फिर जी लें हम।

किसने क्या सोचा ये कौन करे अब परवाह
किसने क्या कहा इसकी किसे है चिंता।
व्यर्थ ही समय बरबाद करे बिना
अपने सपनो का संसार बनाएं हम।

मूल नही उन रिश्तों का
जो तनहा तुम्हे भीड़ में छोडें।
मूल नहीं उन बातों का,
जो ज़ख्मो को केवल खोदें।

राही तू अकेला है,
मत भूल इस बात को कभी।
तन्हाई को लेकर साथ
अब कोई मंजिल ढूंढ नई।

Friday, April 17, 2009

खालीपन-मेरे सभी सईनियरस के लिए

आज का यह दिन क्यूँ आया हमारे जीवन में,
एक अजब सा एहसास है मेरे मन में।
आंखों में अश्कों का सैलाब-सा रुका है
मनो एक खालीपन-सा मेरे दरवाज़े पर आ खड़ा हुआ है।

रोकूँ कैसे तुम्हे समझ नही आता,
काश ये वक्त आज यही थम जाता।
जिन हाथों को थाम चलना सीखा था IIIT में मैंने,
क्यूँ वक्त चाहता है उन्हें मुझसे दूर यूँ कर लेना।

हॉस्टल के उन कमरों में नए चेहरों का बसेरा होगा,
तेरी खिलखिलाहट का तब भी वहाँ बसेरा होगा।
एक बच्चे की तरह जाओंगी खटखटाने कमरा तेरा,
जानती हूँ जबकि कोई न वहाँ जवाब देने वाला होगा।

LT की lab में हमेशा मस्ती हुआ करेगी,
तेरे लतीफों की हँसी दूर तक गूंजा करेगी।
कोई कभी न भर पायेगा तेरे दिए खालीपन को,
तेरे प्यार और प्रेरण की बूँद मेरे खून में बहेगी।

आज दुआ है बस यही, नई ऊन्चायिओं को पाओ तुम,
जीवन के इस पग पर निरंतर आगे बढो तुम।
एक बात लेकिन कहना चाहूंगी तुमसे आज
दिल के किसी कोने में रखना हमें याद
बस यही है तेरे दिए हुए खालीपन का इलाज।

Monday, February 16, 2009

क्यूँ जो चाहिए वो उस पल मिलता नही,
हर इच्छा पूरी होने के बाद भी इच्छाएं ख़तम होती नही।
मनतैँ मांगे इंसान, पर पूरी होने में वक्त लगता है,
तब तक इंसान इतिहास बनता दीखता है।

चाहत की सीमाएं कीसने मापी हैं अब तक,
धड़कनों की रफ़्तार नही जान पाया कोई अब तक।
दीळ की बात बस दिल तक पहुंचाई नही जाती,
दिए को छोड़ मानो अकेले चली हो बाति।

क्यूँ कुछ पन्ने कोरे ही रह जाते हैं,
चुने हुए रंग बेकार पड़े रह जाते हैं।
जल जाती है इंसान की चीता भी,
कोरी राख ही केवल बाकी रह जाती है।

Saturday, February 14, 2009

नई शुरुआत

आज खोल दरवाज़े खुशीयों को अन्दर आने दो न,
पलकों पर छीपे आंसुओं को ढूंढ बाहर नीकालो न।

हँसना है मुझको भी आज हंस लेने दो,
इस जीवन के हर रंग से मुझे ख़ुद को रंग लेने दो।

जी रही थी हर पल जब मैं तुम्हारे लीये,
तुमने ख़ुद ही भुजा दीये आशाओं के सब दीए।

वादा करती हूँ तुमसे आज भुला दइया है मैंने तुमको,
नई इच्छाओं के साथ अब आगे चलना है मुझको।

जीवन है एक अमूल्य तोहफा क्यों छोड़ूँ मैं इसका साथ,
बहा तुम्हारी यादों को आज मैंने थामा है इसका हाथ।।

Tuesday, February 10, 2009

जीवन का सार

कहने को तो ख्वाबों का यूँ अर्थ ही क्या है,
सपनों का सच्चाई से रइश्ता ही क्या है।
कलम लइखे दइल की बातों को तो कविता है,
छइपा लइया दइल के कोने में तो इच्छा है।

इच्छाओं का जीवन में अस्तइत्व ही क्या है,
जीवन में ख़ुद की बातों का मतलब क्या है।
चलता जाए समय का पहइया नइरंतर ही,
मानव के हाथों में आए तो रेखा है।

लइखा हुआ तेरे हाथों में कहाँ जाना है,
उसके कार्य का मानव केवल एक ज़रइया है,
हम कटपुतली, डोर उसी के हाथों में है,
जब भी खइंच जाए तेरे ख्वाबों की वो चइता है.