कल तक तो मेरा हर आंसू तुम्हे रुलाता था,
कल तक तो मेरी हंसी तुम्हे हंसाती थी।
आज क्या हो गया?
मेरी चुनर का रंग क्यूँ खो गया?
शब्द जो थे तुम्हारे लिए,
लिखके अनदेखें से हो गए।
मेरी चाहत नआ समझे थे तुम कभी,
ना उम्मीद ही है अब की समझोगे कभी।
ये मोहब्बत लेकिन दे दी है अब तो तुमको,
ना होगी ये दोबारा अब हमसे।
Tuesday, December 21, 2010
Friday, September 3, 2010
I wonder at times if I am expecting too much,
I donno however, the reson of this feeling as such.
It seems that my care tries to block you,
it seems I push you for things you don wanna do.
I wonder if this is an expectation,
I feel dejected when you say "no".
I feel like crying when i ask you to get me
something but you have your own logical reasons.
I wonder if this is expectaion,
i say i want this,
i know you are not gonna get me that,
and I like a small child stand there all by maself.
I wonder if this is expectation,
you say something and I follow it blindly,
but if I say
your participation is almost nil.
Its not at all expectation,
I donno however, the reson of this feeling as such.
It seems that my care tries to block you,
it seems I push you for things you don wanna do.
I wonder if this is an expectation,
I feel dejected when you say "no".
I feel like crying when i ask you to get me
something but you have your own logical reasons.
I wonder if this is expectaion,
i say i want this,
i know you are not gonna get me that,
and I like a small child stand there all by maself.
I wonder if this is expectation,
you say something and I follow it blindly,
but if I say
your participation is almost nil.
Its not at all expectation,
Saturday, May 1, 2010
मासूम दिल
आज कागज़ पर नाम तेरा लिख रख लिया है सिराहने।
तेरे साथ की खुशबू मानो बसा ली है मैंने ख्वाबों में अपने॥
न जाना तुम दूर दिल तो चाहता है यही।
बांवरा लेकिन ज़िन्दगी की वास्तविकता समझता ही नहीं॥
मासूमियत है ये इसकी या है पागलपन
की मान बैठा है तुम रहोगे सदा इसके साथ॥
जब उदास होगा तब ले लोगे तुम हांथो में हाँथ।
जब रुआंसा होगा तुम दोगे अपने कन्धों का साथ॥
तेरी सांसो की गर्मी को संजोके।
पूजा है इसने दिए की बाती बनाके॥
इसकी लौ तले ये चलेगा अब आहिस्ते आहिस्ते.
नए भाव की इस आग में ये अब जलेगा हलके हलके ॥
Friday, April 30, 2010
न गुलाब की पत्तियां हैं,
न तेरी साँसों का सहारा।
बस रुखा सुखा सा साया है
तेरी बेरुखी से है जो मुरझाया।।
तेरी एक नज़र को तडपा करता है,
तेरी एक हंसी पे फ़िदा है।
पर तू क्यूँ हर बार ऐसा करता है,
की मानो दिल के टुकड़े हज़ार करता है॥
नाज़ुक है यह बहुत, न रुला इसे,
इसलए तेरे इंतज़ार में
खिड़की पर बैठा करता है,
एक आहट पे तेरी उचका करता है॥
न तेरी साँसों का सहारा।
बस रुखा सुखा सा साया है
तेरी बेरुखी से है जो मुरझाया।।
तेरी एक नज़र को तडपा करता है,
तेरी एक हंसी पे फ़िदा है।
पर तू क्यूँ हर बार ऐसा करता है,
की मानो दिल के टुकड़े हज़ार करता है॥
नाज़ुक है यह बहुत, न रुला इसे,
इसलए तेरे इंतज़ार में
खिड़की पर बैठा करता है,
एक आहट पे तेरी उचका करता है॥
Thursday, March 25, 2010
रिश्ते
कुछ रिश्तों का कहने को नाम नहीं होता
कुछ रिश्तो में कहने को कुछ नहीं होता।
बन जाता है फिर भी एक बंधन ऐसा
तोड़ने से भी जिसका वजूद समाप्त नहीं होता।
खून के रिश्तों से बढ़कर हैं ये
प्यार के जल से सीचे गए हैं ये।
रंग बिरंगे फूल पनपते हैं जिनमे
पतझड़ का भी इनपे असर नहीं होता।
नाम नहीं तेरा एहसास बसा है इनमे
तेरी खुशबू आती है इन रिश्तों से।
अनजान थी जीवन के इस रूप से अब तक मैं
बाँधा है यह कैसी डोर में तूने।
खोने को क्या है कुछ भी नहीं
पाने को तेरे साथ से है सब कुछ।
हर पल का एहसास नया सा है
ये मेरे जीवन का सबसे प्यारा रिश्ता है।
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